विदेशी एयरलाइंस के लिए जेट ईंधन महंगा, ATF कीमतों में लगातार दूसरी बार बढ़ोतरी, कमर्शियल LPG भी रिकॉर्ड स्तर पर
नई दिल्ली, 1 मई। वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के प्रभाव के चलते भारत में विदेशी एयरलाइंस के लिए एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) यानी जेट ईंधन की कीमतों में लगातार दूसरे महीने वृद्धि की गई है। सरकारी तेल विपणन कंपनियों द्वारा शुक्रवार को जारी संशोधित दरों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन करने वाली एयरलाइंस के लिए ATF के दामों में 5 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी की गई है।
ATF कीमतों में बढ़ोतरी के तहत दिल्ली में विदेशी एयरलाइंस के लिए जेट फ्यूल की कीमत 76.55 डॉलर प्रति किलोलीटर बढ़ाकर 1,511.86 डॉलर प्रति किलोलीटर कर दी गई है। यह संशोधन ऐसे समय में किया गया है जब वैश्विक कच्चे तेल बाजार में अस्थिरता और भू राजनीतिक परिस्थितियों के कारण ऊर्जा लागत में लगातार इजाफा हो रहा है।
हालांकि घरेलू एयरलाइंस के लिए इस बार ATF दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया। इससे पहले अप्रैल में घरेलू विमानन कंपनियों के लिए जेट ईंधन की कीमतों में लगभग 25 प्रतिशत की बड़ी बढ़ोतरी की गई थी। उद्योग सूत्रों के अनुसार सरकार और तेल कंपनियां घरेलू यात्रियों पर अत्यधिक बोझ से बचाने के लिए संतुलित मूल्य निर्धारण रणनीति अपना रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी एयरलाइंस पर बाजार आधारित मूल्य सीधे लागू किए जा रहे हैं, जबकि घरेलू विमानन क्षेत्र के लिए कीमतों को नियंत्रित रखा जा रहा है ताकि देश के भीतर हवाई यात्रा लागत में अत्यधिक वृद्धि न हो।
इसी बीच व्यवसायिक गतिविधियों में उपयोग होने वाले 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है। दिल्ली में अब एक कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 3,071.50 रुपये पहुंच गई है, जो पहले 2,078.50 रुपये थी। लगातार तीसरे महीने बढ़ोतरी के चलते व्यावसायिक गैस सिलेंडर की लागत में कुल 1,300 रुपये से अधिक का इजाफा हो चुका है।
होटल, रेस्तरां और खाद्य व्यवसाय से जुड़े उद्योगों पर इस मूल्य वृद्धि का सीधा असर पड़ने की संभावना है। वहीं घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिली है क्योंकि घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में कोई नया बदलाव नहीं किया गया है।
ऊर्जा बाजार विशेषज्ञों के अनुसार यदि वैश्विक संकट और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रही, तो आने वाले महीनों में परिवहन, विमानन और व्यापारिक क्षेत्रों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव देखने को मिल सकता है.