जबलपुर, 1 मई। मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी डैम में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे ने कई परिवारों की जिंदगी बदल दी। इस त्रासदी ने सिर्फ जानें नहीं लीं, बल्कि कई मासूम बच्चों से उनका सबसे बड़ा सहारा भी छीन लिया। हादसे के बाद 10 वर्षीय तनिष्क बार-बार अपनी मां के बारे में पूछ रहा है। उसकी मासूम आवाज में उम्मीद है, लेकिन परिवार और आसपास मौजूद लोगों के पास उसके सवालों का कोई आसान जवाब नहीं बचा।
जबलपुर क्रूज हादसा उस समय हुआ जब 42 वर्षीय मनोज श्रीवास अपने परिवार के साथ एक सुखद दिन बिताने बरगी डैम पहुंचे थे। उनके साथ पत्नी, छोटे भाई और तीन बच्चे भी मौजूद थे। परिवार ने छुट्टी के दिन को खास बनाने के लिए क्रूज यात्रा का विकल्प चुना था। शुरुआत में माहौल उत्साह से भरा था। बच्चे खुश थे, तस्वीरें ली जा रही थीं और पूरा परिवार इस पल को यादगार बना रहा था।
प्रत्यक्षदर्शियों और परिवार के सदस्यों के अनुसार मौसम धीरे-धीरे खराब होने लगा। तेज हवाएं चलने लगीं और आसमान में बादल घिरने लगे। इसके बावजूद क्रूज संचालन जारी रहा। स्थिति बिगड़ने पर यात्रियों को लाइफ जैकेट दी गई, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।
कुछ ही देर में तेज हवाओं और ऊंची लहरों ने क्रूज का संतुलन बिगाड़ दिया। नाव अचानक असंतुलित होकर पलट गई। पानी तेजी से अंदर भरने लगा और यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। हर ओर चीख-पुकार सुनाई देने लगी। लोग अपने परिजनों को बचाने की कोशिश में संघर्ष करते रहे।
मनोज श्रीवास की बेटी तनिष्का ने बताया कि हादसा इतना अचानक हुआ कि किसी को संभलने का अवसर तक नहीं मिला। कुछ ही पलों में खुशियों से भरा सफर भयावह त्रासदी में बदल गया।
अब तक इस हादसे में नौ लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य घायल हैं। प्रशासन द्वारा राहत और बचाव कार्य जारी है। हादसे ने सुरक्षा व्यवस्थाओं और मौसम चेतावनी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह घटना सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि उन परिवारों के लिए जीवनभर का दर्द बन गई है जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया। जबलपुर क्रूज हादसा आने वाले समय में पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा मानकों की आवश्यकता को और अधिक गंभीरता से देखने की चेतावनी देता है.







